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तुम्हीं मिटाओ मेरी उलझन

तुम्हीं मिटाओ मेरी उलझन

ममता की मूरत

ममता की मूरत

तू है






कानों में मधुर

राग रागिनी

खिलखिलाती झनक

जीवन सफ़र की

अंतरंग सहेली

माँ तू है!



आँखों में बसी

रूप रोशनी

मरहम-सी छुवन

कड़ी धूप में

छाँव शीतल

माँ तू है!



खुशबू-सी पावन

मुस्कुराता गगन

साए में दर्द के

हँसने की लगन

सुलझी पहेली

माँ तू है!



एक मीठा स्वाद

सुंदर अहसास

डगमगाते क्षणों में

स्थिर विश्वास

सागर अथाह

माँ तू है!



- नीलम जैन

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